दोस्तों आज मुझे बड़े खेद के साथ कहना पड़ रहा है जिस देश में हर बर्ग के लोग बहुत ही अमन चैन से रहते है वहीं पर कुछ देश द्रोही अपने निजी हित के संचय के लिए कुछ भी कह रहे है ।
असहिष्णुता भारत में कभी नहीं रही और न ही कभी होगा । बस कुछ लोग अपनी रोटी सेकना बंद कर दे । सबसे कमाल की बात तब हो जाती है जब नेतावो के कहने पर कुछ लोग उसे लकीर का फ़क़ीर मान लेते है उसे अपनी बात मान के उसे हवा में उड़ने लगते है
मैँ एक रेफरेन्स के लिए यह टाइम न्यूज़ का न्यूज शेयर कर रहा हु इसमें हमारे गायक रहमान भाई कुछ बताना चाह रहे है हम लोगो से, कृपया आप इसे समझे ।
@आभार http://navbharattimes.indiatimes.com/state/other-states/other-cities/a-r-rahman-identifies-with-aamir-khan-says-he-too-faced-similar-situation/articleshow/49916256.cms
" ईरानी फिल्म 'मुहम्मद: मेसेंजर ऑफ गॉड' में संगीत देने के लिए मुंबई की रजा अकादमी ने उनके खिलाफ फतवा जारी किया था। कुछ लोगों का आरोप था कि इस फिल्म का शीर्षक पैगंबर का अपमान करने वाला है। फतवे के जवाब में एआर रहमान ने सफाई देते हुए कहा था कि मैंने यह फिल्म नहीं बनाई और सिर्फ संगीत देने का काम किया है।"
अगर भारत में इस कथन में सबसे पहले एक मुसलमान भाई ही मुस्लमान भाई के विरोध में फतवा जारी कर देता है। तो क्या यह भी असहिष्णुता है ? देश में सब भाई भाई है ऐसे अगर कही दंगा फसाद होता है तो उसमे वही आता है जिसको राजनितिक फायदा या अपनी प्रशिद्धि की जरुरत होती है ।
मैंने अभी तक जितने लोगो से भी पूछा सबने यही बोला ये कुछ चंद लोगो के द्वार किया जा रहा सडयंत्र है और कुछ नहीं ।
अगर इतने बड़े देश में कही एक दो घटना होती है तो उसे राज्य और केंद्र की सरकार को मिल कर हमेशा के लिए समाप्त कर देना चाहिए न की राज्य अपनी गलती को छुपाने के लिए केंद्र पर आरोप लगये और केंद्र राज्य पर ।जहां तक मै समझता हु केंद्र की सरकार हर जगह हुए घटना में राज्य सरकार जैसे कार्य नहीं कर सकती। हा अगर कर सकती तो राज्य सरकार की जरुरत ही नहीं पड़ती ।
मैंने अभी तक जबसे ये मुद्दा चल रहा है सिर्फ कुछ राजनितिक नेता, अभिनेता , लेखक (जो कल्पनावो के दुनिया में अक्सर रहते हुए ) टीवी स्क्रीन पर न्युज चैनल पर जहा ये लोग जाते है वही देखा है । कभी कीसी जनता के कहते या बाते करते नही सुना ।
अप्प सबको मै बता देना चाहता हु की केवल भारत ही एक मात्र ऐसा राष्ट्र है जहा हर कोई गर्व से कह सकता है वो हिन्दू है या मुसलमान या कोई और ।
असहिष्णुता भारत में कभी नहीं रही और न ही कभी होगा । बस कुछ लोग अपनी रोटी सेकना बंद कर दे । सबसे कमाल की बात तब हो जाती है जब नेतावो के कहने पर कुछ लोग उसे लकीर का फ़क़ीर मान लेते है उसे अपनी बात मान के उसे हवा में उड़ने लगते है
मैँ एक रेफरेन्स के लिए यह टाइम न्यूज़ का न्यूज शेयर कर रहा हु इसमें हमारे गायक रहमान भाई कुछ बताना चाह रहे है हम लोगो से, कृपया आप इसे समझे ।
@आभार http://navbharattimes.indiatimes.com/state/other-states/other-cities/a-r-rahman-identifies-with-aamir-khan-says-he-too-faced-similar-situation/articleshow/49916256.cms
" ईरानी फिल्म 'मुहम्मद: मेसेंजर ऑफ गॉड' में संगीत देने के लिए मुंबई की रजा अकादमी ने उनके खिलाफ फतवा जारी किया था। कुछ लोगों का आरोप था कि इस फिल्म का शीर्षक पैगंबर का अपमान करने वाला है। फतवे के जवाब में एआर रहमान ने सफाई देते हुए कहा था कि मैंने यह फिल्म नहीं बनाई और सिर्फ संगीत देने का काम किया है।"
अगर भारत में इस कथन में सबसे पहले एक मुसलमान भाई ही मुस्लमान भाई के विरोध में फतवा जारी कर देता है। तो क्या यह भी असहिष्णुता है ? देश में सब भाई भाई है ऐसे अगर कही दंगा फसाद होता है तो उसमे वही आता है जिसको राजनितिक फायदा या अपनी प्रशिद्धि की जरुरत होती है ।
मैंने अभी तक जितने लोगो से भी पूछा सबने यही बोला ये कुछ चंद लोगो के द्वार किया जा रहा सडयंत्र है और कुछ नहीं ।
अगर इतने बड़े देश में कही एक दो घटना होती है तो उसे राज्य और केंद्र की सरकार को मिल कर हमेशा के लिए समाप्त कर देना चाहिए न की राज्य अपनी गलती को छुपाने के लिए केंद्र पर आरोप लगये और केंद्र राज्य पर ।जहां तक मै समझता हु केंद्र की सरकार हर जगह हुए घटना में राज्य सरकार जैसे कार्य नहीं कर सकती। हा अगर कर सकती तो राज्य सरकार की जरुरत ही नहीं पड़ती ।
मैंने अभी तक जबसे ये मुद्दा चल रहा है सिर्फ कुछ राजनितिक नेता, अभिनेता , लेखक (जो कल्पनावो के दुनिया में अक्सर रहते हुए ) टीवी स्क्रीन पर न्युज चैनल पर जहा ये लोग जाते है वही देखा है । कभी कीसी जनता के कहते या बाते करते नही सुना ।
अप्प सबको मै बता देना चाहता हु की केवल भारत ही एक मात्र ऐसा राष्ट्र है जहा हर कोई गर्व से कह सकता है वो हिन्दू है या मुसलमान या कोई और ।

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