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अन्ना की मांग लोकतंत्र के लिए खतरनाक है: जस्टिस वर्मा

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जे. एस. वर्मा ने कहा कि सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस के. जी. बालाकृष्णन को पद छोड़ने के लिए मनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अन्ना हजारे की मांग देश के संवैधानिक ढांचे के लिए खतरनाक हो सकती है। यह मांग स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। 

जस्टिस वर्मा ने कहा, 'मैंने काफी समय पहले कहा था कि उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। यदि वह अपनी इच्छा से ऐसा नहीं करते हैं तो सरकार को उन्हें इसके लिए मनाना चाहिए।' 

वर्मा ने यह भी कहा कि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनके बने रहने से इसकी अंतर्राष्ट्रीय छवि भी प्रभावित हो सकती है। 

जस्टिस बालाकृष्णन जनवरी 2007 से मई 2010 के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे। उनके परिवार के सदस्यों पर इनकम से अधिक प्रॉपर्टी अर्जित करने का आरोप है। 

न्यायपालिका को नष्ट कर सकती है अन्ना की मांग 

जस्टिस वर्मा ने प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने की अन्ना हजारे की मांग को गलत बताते हुए कहा कि यह संविधान की मूल भावना के विपरीत होगा। 

एक टीवी चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा, हजारे की 16 अगस्त से दोबारा अनशन पर जाने की घोषणा अलोकतांत्रिक है। अगर न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाया गया, तो इससे देश का लोकतांत्रिक ढांचा प्रभावित होगा। लोकपाल को जजों से सवाल पूछने का अधिकार होगा और उसके आदेशों को अदालत में चुनौती दी जा सकेगी। ऐसा करना एक गलती होगी। इससे अच्छे लोग इस पेशे में आने से बचेंगे। संविधान के अंतर्गत न्यायपालिका के कामकाज की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र न्यायपालिका होनी चाहिए।
Anand Kumar

Anand Kumar

I am Anand Kumar, Co-Founder of ASBrainZ Technologies. Apart of this I am founder & Editor at Csharpmagic.com/www.Smartonpay.com. I like to share my Knowledge,Thought which comes in mind. This thoughts and view is my personal opinion .

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