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पटकनी स्ट्रैटजी में माहिर थे धीरूभाई

यह धीरूभाई अंबानी ही कर सकते थे। वह जानते थे कि कॉरपोरेट और स्टॉक मार्केट 'वॉर' कैसे लड़े जाते हैं। जब कलकत्ता के कुछ बीयर कार्टेल ने धीरुभाई के प्लान को फेल करने की स्ट्रैटजी बनाई तो उन्होंने अपने 'कॉन्टैक्ट्स' का इस्तेमाल करके उन्हें जोरदार पटखनी दी।

इंडिया में इनवेस्टमेंट के आईपीओ विकल्प को घर-घर पहुंचाने का श्रेय रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रमुख धीरूभाई अंबानी को जाता है। रिलायंस का पहला आईपीओ अक्टूबर 1977 में दस रुपये पर आया था और उसका भाव लगातार बढ़ता गया। इससे इनवेस्टरों को खूब फायदा हुआ। 1982 में इसका भाव 186 रुपये चला गया था। उसके बाद कंपनी ने पार्टली कनवर्टिबल डिबेंचर (पीसीडी) इश्यू किया। इसमें ब्याज दिया जाता है और कुछ समय बाद पीसीडी का कुछ हिस्सा शेयरों में बदला जाता है।

उस समय स्टॉक मार्केट में बेयर और बुल में 'वॉर' होते ही रहते थे। ऐसा माना जाता है कि कलकत्ता के कुछ मंदडि़यों ने धीरूभाई के पीसीडी को फेल करने के लिए रिलायंस के शेयर की शॉर्ट सेल कर दी ताकि जब भाव कम हो जाएगा तो पीसीडी कोई लेगा नहीं। उनकी स्ट्रैटजी थी कि जब भाव कम हो जाएंगे तो उन्हें खरीदकर डिलीवरी दे देंगे। इस शॉर्ट सेल से रिलायंस का शेयर 18 मार्च को आधा घंटे में ही 131 रु. से गिरकर 121 रु. पर आ गया। बेयर कार्टेल ने 3.50 लाख शेयर बेच डाले।

'द ग्रेट इंडियन स्कैम-स्टोरी ऑफ द मिसिंग रु. 4000 करोड़' बुक में एस.के. बरुआ और जे.आर. वर्मा ने लिखा है कि 'बेयर कार्टेल की इस स्ट्रैटजी का मुंहतोड़ जबाब देने के लिए धीरूभाई ने अपने एनआरआई इनवेस्टरों-ब्रोकरों को जगाया। उन्होंने शेयरों की जमकर खरीद शुरू कर दी। धीरूभाई के चहेते इन 'बुल' ने कंपनी के 10 करोड़ रु. से 8 लाख शेयर खरीद डाले। बाजार में यह जिज्ञासा थी कि यह शेयर कौन खरीद रहा है? बेयर कार्टेल की स्ट्रैटजी फेल हो गई। उनके चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगी। धीरूभाई के चहेते ब्रोकरों ने डिलीवरी मांगी लेकिन बेयर कार्टेल के पास शेयर थे ही नहीं।

उस समय डिलीवरी न देने के कारण औंधा बदला देना होता था। औंधा बदले से आशय उसव्यवस्था से है जिसमें सेटलमेंट के दिन शेयरों की डिलीवरी न देने पर बेयर बुल को प्रति शेयरचार्ज देते हैं। लेकिन इस मामले में यह राशि बहुत थी जिसे बेयर देने में असमर्थ थे और बाजारमें शेयर खरीदने के लिए उपलब्ध ही नहीं थे। बाजार में भुगतान संकट छा गया। बुधवार कोबाजार बंद रखना पड़ा। शेयरों का भाव 201 रु तक बढ़ गया। 

ऐसा कहा जाता है कि बाजार को इस संकट से बचाने और बेयर कार्टेल के झुकने के कारणधीरूभाई ने उनसे एक अनौपचारिक समझौता किया और स्वयं शेयर दिए। फिर इन शेयरों कोबेयर कार्टेल ने डिलीवर कर इस संकट से निजात पाई। बरुआ और वर्मा लिखते हैं कि ऐसीचर्चा थी कि इसके लिए बेयर कार्टेल ने धीरूभाई को 150 रु प्रति शेयर से भुगतान किया औरधीरूभाई ने अपनी इस पटकनी स्ट्रैटजी से अरबों रुपये कमाए। 

यह कहानी हमें बताती है कि धीरूभाई किस मिट्टी के बने हुए थे। वह कितने चतुर और मंझेहुए बॉक्सर थे जो सामने वाले के पंच को कैसे उलट देते थे। स्ट्रैटजी आजकल के सीईओ कोसीखनी चाहिए ताकि वे अपने विरोधियों को सिर उठाने का मौका ही न दें 

अच्छे अच्छों पर भारी पड़ रहा है ये ‘युवा’ अरबपति!


एक तरफ जहां सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती जा रही है वहीं इसके संस्थापक मार्क जकरबर्ग के साथ भी नई नई कामयाबियां जुड़ती जा रही हैं। अब खबर है कि जकरबर्ग ने जानी मानी सर्च इंजन साइट गूगल के संस्थापकों- सर्जी ब्रिन और लैरी पेज को पछाड़ते हुए टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनियाभर में तीसरे सबसे अमीर शख्स का रुतबा हासिल कर लिया है। 

दरअसल फेसबुक ने हाल ही में जीएसवी कैपिटल कॉर्पोरेशन नाम की कंपनी के साथ एक समझौता किया। जिसके तहत जीएसवी ने 29.28 डॉलर प्रति शेयर की कीमत पर फेसबुक के 2.25 लाख शेयर खरीदे हैं। इसके चलते अब कंपनी की वैल्यू बढकर 70 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। 

फेसबुकी की वैल्यू में हुए इस इजाफे के बाद जकरबर्ग की संपत्ति भी बढ़कर 18 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं मौजूदा समय में गूगल के संस्थापकों- सर्जी ब्रिन और लैरी पेज की कुल संपत्ति 17 अरब डॉलर की है। इससे पहले संपत्ति के मामले में जकरबर्ग एप्पल कंपनी के प्रमुख स्टीव जॉब्स को भी पिछले साल मात दे चुके हैं। 

आपको बता दें कि टेक्नोल़ॉजी के क्षेत्र में कारोबार करने वालों में अब केवल दो लोग ही जकरबर्ग से ज्यादा अमीर हैं। इनमें पहले हैं माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख बिल गेट्स जिनकी कुल संपत्ति 65 अरब डॉलर की है। वहीं दूसरे नंबर पर हैं ऑरेकल के प्रमुख लैरी एलिसन। इनकी कुल संपत्ति 39.9 अरब डॉलर की है।



यह बैंक 15,000 कर्मचारियों की छुट्टी करेगा



भारत और चीन दुनिया में ऐसे देश हैं जहां लगातार नौकरियां मिलती जा रही हैं लेकिन यूरोप और अमेरिका की हालत बिगड़ती जा रही है और वहां कर्मचारियों की नौकिरयां खतरे में पड़ती जा रही हैं।

अब ऐसा ही मामला इंग्लैंड से आया है जहां बैंक कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ती जा रही है। वहां अपने खर्च कम करने के लिए एक बड़ा बैंक कुल 15,000 कर्मचारियों की छुट्टी करने जा रहा है। अपनी नई स्ट्रेटजी के तहत वहां का लॉयड्स बैंकिंग ग्रुप 15,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने जा रहा है। यह बैंक बीमा तथा वित्तीय क्षेत्र में भी है और वह इन सबसे कर्मचारियों की छंटनी करेगा। बैंक ने यह भी फैसला किया है कि वह 30 की बजाय सिर्फ 15 देशों में ही काम करेगा।

बैंक ने जो कटौती कार्यक्रम बनाया है उसका फायद उसे 2014 तक मिलने लग जाएगा। उस समय तक वह 2.41 अरब डॉलर बचा चुकेगा। इसके अलावा वह फायदे की जगहों पर निवेश भी करेगा।

लॉयड्स बैंक के सीईओ ऐंटोनियो होर्टा-ओसोरियो ने लंदन में कहा कि उनके बैंक को ये कदम इसलिए उठाने पड़ेंगे कि उसे फिर से लाभ में आना है, ब्रिटिश सरकार को आर्थिक मदद करनी है और हमें टैक्सदाताओं के पैसे लौटाने हैं। बैंक को पहली तिमाही में 2.44 अरब पाउंड का घाटा हुआ है। बैंक के शेयर काफी गिर चुके हैं।




आज से बदल जाएगा ATM इस्तेमाल करने का नियम!


अगर आप भी एटीएम मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल करने वालों में से हैं तो यह खबर सीधे आपसे जुड़ी हुई है। दरअसल अब तक आप अन्य बैंकों के एटीएम यानी जिस बैंक में आपका अकाउंट नहीं है, उसके एटीएम से बिना किसी एक्सट्रा चार्ज के पांच बार पैसे निकाल सकते थे लेकिन बैलेंस इंक्वायरी, पिन बदलने और मिनी स्टेटमेंट जैसे गैर-वित्तीय काम के लिए ऐसी पाबंदी नहीं थी। यानी आप जितनी बार चाहें उतनी बार बिना किसी शुल्क के ये काम कर सकते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बैंकों में लागू होने जा रहे नए नियम के मुताबिक आप दूसरे बैंकों के एटीएम से महीने में केवल पांच बार ही पैसा निकाल सकेंगे या बैलेंस चेक कर सकेंगे।

ये नया नियम आज से ही लागू हो रहा है। इसके बाद अगर पैसे निकालने या फिर बैलेंस इंक्वायरी के लिए महीने में पांच बार से ज्यादा किसी अन्य बैंक के एटीएम का इस्तेमाल किया जाता है तो इस पर शुल्क देना होगा।

हालांकि एटीएम इस्तेमाल करने वालों के लिए एक राहत की खबर भी है। रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के मुताबिक आज से अगर आपको एटीएम मशीन से पैसा नहीं मिलता है और गलती से आपके खाते से रकम काट दी जाती है तो ये रमक आपके खाते में 7 कार्य दिवसों के भीतर वापस कर दी जाएगी। और अगर कोई बैंक ऐसा नहीं कर पाता है तो ग्राहक के खाते में हर रोज 100 रुपए के हिसाब से पेनाल्टी का भुगतान करना होगा।
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