देश के लिए शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों के साथ छत्तीसगढ़ प्रशासन इस तरह संवदेनहीन हो जाएगा कि शहीदों के पार्थिव शरीर को कचरा ढोने वाले वाहन से मुख्यालय लाएगा, यह शायद किसी ने भी नहीं सोचा होगा। डीजीपी विश्व रंजन ने मंगलवार को स्वीकार किया कि दंतेवाड़ा जिले में रविवार रात नक्सली हमले में शहीद तीन पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर वाले ताबूतों को नगरपालिका की कचरा ढोने वाली एक गाड़ी से पुलिस मुख्यालय लाया गया।
रंजन बताया, ' उस समय कोई ऐम्बुलेंस उपलब्ध नहीं था....केवल नगरपालिका का वाहन ही मौजूद था। ' रंजन ने कहा कि पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर वाले ताबूत को लाने से पहले मिनी ट्रक की अच्छे तरीके से साफ-सफाई की गई थी।
गौरतलब है कि तीन पुलिसकर्मियों लक्ष्मण भगत, असलन इक्का और भूषण मांडवई के पार्थिव शरीर सोमवार को किरनदुल के विस्फोट स्थल से दंतेवाड़ा मुख्यालय लाए गए। इसके बाद पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांवों के लिए भेजा गया।
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अंकित गर्ग ने भी स्वीकार किया कि पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर वाले ताबूतों को नगरपालिका के वाहन में लाया गया था, लेकिन उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह कचरा ढोने वाला वाहन था तब उन्होंने लम्बी चुप्पी के बाद कहा, ' मैं नहीं जानता यह किस तरह का वाहन था लेकिन हां यह नगरपालिका का वाहन था। '
दंतेवाड़ा के पत्रकार विनोद सिंह ने कहा कि किरनदुल और उसके नजदीकी कस्बे बाचेली में कई ऐम्बुलेंस मौजूद हैं। दोनों कस्बों में सरकार के नियंत्रण वाली खनन कम्पनी एनएमडीसी के कर्मचारियों के लिए कई अस्पताल, बाजार और रिहायशी कॉलोनियां हैं। सिंह ने कहा, ' किसी ने ऐम्बुलेंस लाने का प्रयास ही नहीं किया। एक पुलिसकर्मी जिसे शहीदों के सम्मान के लिए पार्थिव शरीर को भेजने के लिए कहा गया था, उसने वाहन के लिए किरनदुल के नगरपालिका को फोन किया। '
गौरतलब है कि तीनों पुलिसकर्मी किरनदुल पुलिस स्टेशन से महज चार किलोमीटर की दूरी पर शहीद हुए। उनके साथ सात लोग उस बोलेरो में सवार थे, जो नक्सलियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग की चपेट में आ गई। एक पुलिसकर्मी ने बाद में दम तोड़ा।
रंजन बताया, ' उस समय कोई ऐम्बुलेंस उपलब्ध नहीं था....केवल नगरपालिका का वाहन ही मौजूद था। ' रंजन ने कहा कि पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर वाले ताबूत को लाने से पहले मिनी ट्रक की अच्छे तरीके से साफ-सफाई की गई थी।
गौरतलब है कि तीन पुलिसकर्मियों लक्ष्मण भगत, असलन इक्का और भूषण मांडवई के पार्थिव शरीर सोमवार को किरनदुल के विस्फोट स्थल से दंतेवाड़ा मुख्यालय लाए गए। इसके बाद पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांवों के लिए भेजा गया।
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अंकित गर्ग ने भी स्वीकार किया कि पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर वाले ताबूतों को नगरपालिका के वाहन में लाया गया था, लेकिन उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह कचरा ढोने वाला वाहन था तब उन्होंने लम्बी चुप्पी के बाद कहा, ' मैं नहीं जानता यह किस तरह का वाहन था लेकिन हां यह नगरपालिका का वाहन था। '
दंतेवाड़ा के पत्रकार विनोद सिंह ने कहा कि किरनदुल और उसके नजदीकी कस्बे बाचेली में कई ऐम्बुलेंस मौजूद हैं। दोनों कस्बों में सरकार के नियंत्रण वाली खनन कम्पनी एनएमडीसी के कर्मचारियों के लिए कई अस्पताल, बाजार और रिहायशी कॉलोनियां हैं। सिंह ने कहा, ' किसी ने ऐम्बुलेंस लाने का प्रयास ही नहीं किया। एक पुलिसकर्मी जिसे शहीदों के सम्मान के लिए पार्थिव शरीर को भेजने के लिए कहा गया था, उसने वाहन के लिए किरनदुल के नगरपालिका को फोन किया। '
गौरतलब है कि तीनों पुलिसकर्मी किरनदुल पुलिस स्टेशन से महज चार किलोमीटर की दूरी पर शहीद हुए। उनके साथ सात लोग उस बोलेरो में सवार थे, जो नक्सलियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग की चपेट में आ गई। एक पुलिसकर्मी ने बाद में दम तोड़ा।
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