मित्रो ,
मेरा ये कहना की "अंधेर नगरी चौपट राजा" हममे से बहुत लोगो को बुरा लग सकता है पर फिर भी मै कहने के लिए विवस हो गया हु । जरा आप ही बताइये क्या कहेंगे आप मेरे इन प्रश्नो के उत्तर में ?
१- जब भारत की बेटी का रेप होता है, तो सबके आखो से पानी आता है , सब रोते है चाहे वो आम आदमी हो या मिनिस्टर , चाहे वो बॉलीवुड, या यूनिवर्सिटी सब के सब घडियाली रुदन करने लगते है । कहते है ये सजा वो सजा लेकिन सजा हो पता है क्या? कोई दिला पाता है ?
२-क्या देश का अगर कोई जिम्मेदार नागरिक जिसे देश की जनता ने सम्मान से अपना नेता चुना अगर वो कोई गलती करता है तो वो माफ़ी के योग्य भी है ? पर जो गवर्नमेंट के लोग है वो उसे माफ़ कर देते है या छुड़वा देते है क्या वो भी उसके साथ माफ़ी के योग्य है ? क्या ये अंधेर नगरी नहीं है ? क्या अच्छे भले देश में जिम्मेदार के गलती करने पे उसे उसके किये से दोगुनी सजा नहीं होना चाहिए?
३-पुरुष जो अपने को सर्बश्रेष्ठ कहते है और ऐसे औरत को जो उसे वजूद देती है जीने को,जो उसे कभी माँ , बहन, बेटी, पत्नी के रूप में न जाने कितने तरह से अपना साथ देती है थोड़ी देर भी नहीं लगती हाथ उठा देता है । उससे सम्मान नही दे पता और अपनी गलतियों उसपे थोप देता है , फिर भी वो सह कर उसकी सेवा करती है , फिर भी ऐसे औरतो को जलाया दिया जाता है , पड़ताड़ित किया जाता है और जब न्याय के लिए जाती है तो उसे या उसके माँ बाप को न्याय का प्रतीक्षा करते करते बेचारी/बेचारे मृत्यु को प्राप्त कर जाती है क्या ये अंधेर नगरी नहीं है ।
४- न्याय करते वक़त नयविद पैसे को न्याय से ज्यादा तवज्जो देते है क्या ये अंधेर नगरी नहीं है ?
५- जहा कुछ चंद रुपयो के लिए इंसान के साथ जानवरो जैसे बेवहार किया है जहा इंसान को अपने शानो शौकत के लिए मार दिया जाता है फिर वो मरने वाला बाहर आज़ाद घूमता है क्या ऐसे न्याय वयवस्था रखने वाले नगरी को अंधेर नगरी नहीं कहा जा सकता है ?
प्रश्न तो बहुत है पर इतना ये समझने के लिए काफी है ।
क्या हो सकता है समाधान ?
बिलकुल हो सकता है अगर सरकार ये निश्चय करके की ऐसे सबको अब न्याय का पाठ पढ़ना है। तो बिल्कुल हो सकता है । जिस देश सरकारी तंत्र देश के गावो गलियो तक पहुंच रखता है उसके लिए असंभव ही क्या है । पर करने के लिए नियत होना चाहिए ।
मुझे सिंघम फिल्म का वो dilogue अभी भी याद है "अगर पोलिस चाहे तो कोई मंदिर से चपल नहीं चुरा सकता" ये कथन बिलकुल सत्य है अगर सरकार और चाह दे माँ, बेटी और देश की इज्जत तो क्या उसकी छाया भी छूने से पहले १००००० बार सोचना पड़ेगा । मर्डर तो इसके स्टार्ट शब्द म के साथ शुरू करने से पहले पेंट गीली हो जाये ।
लेकिन वो भी क्यों चाहेगा, राजा का तंत्र तो वह भी है। .
अब आप ये बताये क्या ये गलत है "अंधेर नगरी चौपट राजा।।।।।।। "
इसमें देश और राज्य दोनों की गतिविधियों और कानून वयवस्था को फोकस किया गया है ।
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