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किस्मत की मारी ! नारी जीवन हाय तुम्हारी बेटी बचाओ - बेटी पढाओ पर ससनीखेज लेख


किस्मत की मारी ! नारी जीवन हाय तुम्हारी
         बेटी बचाओ - बेटी पढाओ पर ससनीखेज लेख
भारत में महिलाओ को देवी की तरह पुजा जाता था यह बात किसी से छिपी नहीं हैं हमारे माननीय प्रधानमंत्री महोदय का गणतंत्र दिवस २०१५ के अवसर पर यह बयान देना की (बेटी बचाओ – बेटी पढाओ ) वाकई प्रशंसनीय है लेकिन ताजा रिपोर्ट के अनुसार जिस अनुपात में बेटियों की संख्या घट रही हैं वह बहुत ही चिंतनीय हैं आखिर वह कारक क्या हैं जिसके वजह से वह माँ – बाप उस मासूम को इस संसार में आने से पहले ही समाप्त करा दे रहे हैं  आज भी हमारे समाज में कन्या के जन्म लेने पर 95% परिवारों में ऐसा मालूम होता है की किसी बृद्ध की मौत हो गया हो (बृद्ध की मौत की उपमा इस लिए की वह मौत गम और ख़ुशी दोनों देता है )आखिर क्या वजह है जिस कन्या की वजह से इस श्रृष्टि की रचना हुई उसी के जन्म पर मातमी चेहरा क्यों ? माननीय प्रधानमंत्री जी आप उस माँ – बाप से पूछिए जो बेटी पैदा होने के बाद , समाज के भूखे भेढ़ीयो से बचा कर पढ़ा लिखा कर युवा किया और जब उसकी शादी की बात आती है तो वही उसे महसूस होता है की मैं बेटी पैदा कर बहुत बढ़ी गलती की क्योकी एक मध्यम परिवार का बेटा जो चतुर्थ श्रेणी का आप के यहाँ सरकारी नौकर है उसकी मांग होती है लगभग 10 लाख रुपया एव चारपहिया वाहन +++++..... उच्च श्रेणी की बात ही कुछ नही पूछना है , माँ – बाप के पास चारा होती है वह बेटी का विवाह उसके भाग्य के भरोसे किसी गरीब घर में कर दे एवं घुट –घुट कर जिन्दगी भर रोने दे या दहेजलोभियों  के पास जाये जो किसी भी वक्त जला कर मार देगे और हमारी सरकारी मशीनरी बेबसी की रोना रोते हुए उसे आँख बंद कर खानापूर्ति कर ठंढे बक्से में डाल देगी प्रधानमंत्री महोदय आप बताये गे उस माँ – बाप को बेटी बचाने पर क्या मिला ?.......क्योकि आपके पास कोई कानून नही है जिससे इस तरह के लोग डरे ........................
अब बात आती है बेटी पढ़ाने की ......हर माँ – बाप की इच्छा होती है की हमारे लाडले पढ़ लिख कर माँ – बाप ,घर परिवार एव समाज का नाम रोशन करे ! जिसके लिए वह अपनी खून पसीने की कमाए गये रुपयों के साथ अपनी लाडली को उच्च शिक्षा हेतु बहार भेजता है शिक्षा के मंदिरों में क्या होता है उसके बारे में लिखने में भी हमे शर्म आती है वहा बाथरुमो में सी सी टी बी कैमरा लगा कर अश्लील फिल्म बनाना ,शिक्षकों का अपनी बेटी जैसी छात्राओ के साथ बलात्कार करना ,ब्लेकमेल करते हुए पंचसितारे होटलों में भेजना आदि कृत खुलेआम हो रहा है सरकार चुप है आरोपियो को कोई डर नही है वे बेख़ौफ़ होकर मासूमो के साथ आत्याचार कर रहे है क्यों की उनके उपर राजनेताओ की असीम कृपा है अगर लड़कीया हाईसोसाएटी में ढल कर बेशर्म हो जाये तो ठीक है नही तो बहशी रूप से मार दी जाती है अन्यथा दिसम्बर २०१२ में पारा मेडीकलछात्रा निर्भया के साथ पुरे भारत के अस्मिता को झकझोर देने वाली शर्मनाक घटना घटी , बेशर्म हमारी न्यायपालिका /कार्यपालिका अभी भी उससे शायद बहशी घटना घटने की इंतजार कर रही है नही तो अभी तक कोई कठोर कानून बन गया होता ,शरीफ बेटी के  माँ – बाप सरकार के लचर रवैया से हैरान है क्यों दूर भेजकर पढ़ायें अपनी शरीफ लाडली को  ?........ 
प्रधानमंत्री महोदय इस स्टेटमेंट को देने से पहले अगर आप एक कठोर कानून (जिससे रेप तो दूर गलत नीयत से कोई देखे भी नही ) बनाये एक ऐसा कानून जिसको जानने के बाद आरोपी  हजार बार सोचे जिससे दुसरे सबक ले अन्यथा मैं ब्याक्तिगत रूप से आपसे अनुरोध करता हु कि आप यह स्लोगन वापस लेले तो बेहतर होगा  आप लोगो (जिसके पास कानून बनाने की / या परिवर्तन करने का अधिकार है ) का भारतीय होना भी पाप है
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