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अभिशाप बना गरीबी ! काश गरीबी बनाया ही नहीं होता भगवन ने ......

अपनी लाइफ में मैंने बहुत कुछ देखा , तरस आता था जब मै गरीबी देखता था , मै सोचता था काश मै उन सबका सहायता कर पाता जो कपडे और रोटी के लिए तरसते है  । लेकिन आज मै यकीन के साथ कह सकता हु उनकी गरीबी के लिए वो खुद जिमेदार नहीं बल्कि सरकार की गलत नीतिया है। दर असल सरकार चाहती ही नहीं की  गरीब जिए भी  ।

बचपन की कुछ बातो को याद करता हु तो डर सा लगता है जो लोग 15रूपये डीजल के लिए नहीं जूटा पाते थे क्या वो आज 50 रूपये जूटा  पाएंगे । दिल्ली सरकार कहती है दिल्ली को केरोसिन मुक्त बनायेंगे ।लेकिन मुझे ये अहसास होता है दिल्ली सरकार  केरोसिन मुक्त नहीं बल्कि गरीब मुक्त दिल्ली बनाना चाहती है ।क्योकि जो लोग केरोसिन में  20 रूपये लगा के किसी तरह अपना रोटी पकाते थे क्या वे 750 रुपये लगा के गैस सिलेंडर ले पाएंगे । इतने रुपये में तो यहाँ वो लोग एक महीने के रासन  खरीद सकते है (पहले एक आदमी 750 रूपये के रासन  में एक महीना काम  चला लेता था ) अब वो जब 750 का गैस खरीदेगा तो क्या वो  गैस , डीजल  खायेगा ?

किसान बड़ी मुस्किल से गावो में 1000-2000 रूपये सालाना कमाते है  , अब तो वे सिर्फ डीजल ही खरीद पाएंगे , रसोई का सामान नहीं। क्योकि 1000-2000 कमाने में सिचाई के लिए अनुमानतः 700 रूपये  की खर्चा होएगी।  ऐसे में न ही वो अपने खेतो की सिचाई कर पाएंगे नहीं वो रासन खरीद पाएंगे। अब उनके पास जीने का दूसरा कौन सा रास्ता सरकार देगी जीस्से वो कम से कम जी सके ?

सरकार  के नेताओ के खजाने एक साल में ही  दोगुनी हो जा रहा है  और अब गरीबो के घर में आधे । कुछ दिन पहले सुनने में आया था , सरकारी लोग ये भी कहते है जब मिनेरल वाटर का दम बढता है तो कुछ नही होता ,फिर पेट्रोल डीजल और गैस के दामो में बढ़ोतरी पे पब्लिक इतना क्यो चिलाती है ?  ऐसे में उन लोगो (सरकार) को  शायद  उनके लिए ही इन सबका दाम बढ़ना चाहिए जो मिनेरल वाटर पिते है उनका नहीं जिन्हें ये भी नहीं पता होता की पानी ख़रीदा भी जाता है ।

सरकार  की ये कैसी  मैनेजमेंट है  जिसमे अपर बर्ग दोगुने और तिगुने रफ़्तार से तरकी कर रहा है जबकि गरीब बर्ग उसी रफ़्तार से  गरीब बनता जा रहा है ।  इतने स्कैम हो रहे है ,घोटाला हो रहा है जिससे  भारत के लगभग  एक साल की जी . डी .पी  ही गायब हो जा रही है फिर  जब पैसो  की कमी होती है तो सरकार अपना बोझ सीधे पब्लिक पे डाल देती है  । आज से 70 साल पहले जब  अंग्रेजी हुकूमत को पैसे की कमी होती थी जो कर इतना बढ़ा  देते थे की उनका कम चल जाये उस दौरान पिसते थे हमसब ।

आज भी लगता है हम आजाद ही नहीं हुए बस उस अंग्रेजी हुकूमत ने आपना शासन अपने ही जैसे किसी और के  हाथ कर के चली गयी है ।  ऐसे में हमे क्या करना चाहिए आप जबाब दे !

Anand Kumar

Anand Kumar

I am Anand Kumar, Co-Founder of ASBrainZ Technologies. Apart of this I am founder & Editor at Csharpmagic.com/www.Smartonpay.com. I like to share my Knowledge,Thought which comes in mind. This thoughts and view is my personal opinion .

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