उत्तर कोरिया ने पाकिस्तान से संवेदनशील परमाणु तकनीक हासिल करने के लिए 1990 के दशक के उत्तरार्द्ध में उसके शीर्ष सैन्य अधिकारियों को रिश्वत दी थी। यह दावा पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक ए. क्यू. खान ने किया है।
' वॉशिंगटन पोस्ट ' के अनुसार, खान ने कुछ ऐसे दस्तावेज पेश किए हैं, जिनसे पता चलता है कि उन्होंने स्वयं उत्तर कोरिया के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दी गई 30 लाख डॉलर से अधिक की राशि पाकिस्तान सेना के अधिकारियों को हस्तांतरित की। खान ने 1998 में उत्तर कोरिया के अधिकारियों द्वारा लिखा गया पत्र भी जारी किया है, जिसमें इस गुप्त समझौते की विस्तृत जानकारी है। पश्चिमी खुफिया अधिकारी इस पत्र को वास्तविक मान रहे हैं। हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे फर्जी बताया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि पत्र सही है तो यह परमाणु हथियारों से संबंधित भ्रष्टाचार को दर्शाता है। पत्र पर 15 जुलाई, 1998 की तिथि अंकित है और इस पर ' गुप्त ' लिखा है। इस पर उत्तर कोरिया की वकर्स पार्टी के सचिव जोन बायोंग हो के हस्ताक्षर हैं।
पत्र में कहा गया है कि पाकिस्तान सेना के एक अधिकारी को ' 30 लाख डॉलर का भुगतान 'पहले ही किया जा चुका है। ' पांच लाख डॉलर ' और कुछ जेवरात एक अन्य अधिकारी को दिए गए हैं। पत्र में लिखा गया है, ' कृपया हमारे सहमति संबंधी दस्तावेज, उपकरण इत्यादि ....... (पाकिस्तान स्थित उत्तर कोरिया के दूतावास में एक अधिकारी) को दें, जो मिसाइल उपकरण की आपूर्ति के बाद हमारे विमान से लौटने वाले हैं। ' पत्र में पाकिस्तान के जिस सैन्य अधिकारी को 30 लाख डॉलर का भुगतान करने की बात कही है, वह पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जहांगीर करामत हैं। लेकिन करामत ने इसे गलत बताया है। उनके मुताबिक खान दूसरों पर आरोप लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पत्र में लगाए गए सभी आरोपों को गलत बताया। सेना के एक अन्य शीर्ष अधिकारी (सेवानिवृत्त) लेफ्टिनेंट जनरल जुल्फिकार खान ने भी इसे ' मनगढंत 'बताया। गौरतलब है कि वर्ष 2000 में अमेरिका ने पाकिस्तान पर उत्तर कोरिया को बैलिस्टिक मिसाइल के बदले परमाणु हथियार की तकनीक देने का आरोप लगाया था।
Anand Kumar
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