योग गुरु बाबा रामदेव से खुन्नस खाई केंद्र सरकार ने उन्हें घेरने के लिए हरसंभव कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण के खिलाफ फर्जी पासपोर्ट मामले में सीबीआई की जांच शुरू होने के बाद अब केंद्र ने सीधे रामदेव पर हमला किया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनके खिलाफ फेमा के तहत कार्रवाई में जुट गया है। इसके तहत बाबा और उनसे जुड़े संस्थानों की विदेशों में संपत्ति और निवेशों की गुपचुप जांच शुरू कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय इस बात की भी जांच कर रहा है कि रामदेव द्वारा हुए निवेश और विदेशी मुद्रा के लेन-देन में फॉरेन एक्सचेंज नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। जल्द ही बाबा को नोटिस भेजकर जवाब-तलब किया जाएगा।
निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी के निशाने पर स्कॉटलैंड का एक द्वीप है जिसे रामदेव के एक भक्त ने उन्हें उपहार के तौर पर दिया था। लिटिल कमब्रे नाम का यह आइलैंड स्कॉटलैंड के लार्ग्स कस्बे के पास है। यह भारत से बाहर बाबा रामदेव का बेस माना जाता है और यहीं पर रामदेव ने वेलनैस सेंटर भी खोल रखा है। बाबा रामदेव के अलावा उनके ट्रस्ट पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के निवेश और पैसों के लेनदेन पर भी कड़ी निगाह रखी जा रही है।
जांच के बाद अगर कुछ गड़बड़ी मिली तो उसके बाद यह तय किया जाएगा कि बाबा के खिलाफ फेमा के तहत केस दर्ज किया जाए या प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत। यह जांच विभिन्न आधिकारिक स्रोतों से मिले दस्तावेजों और इंटेलिजेंस जानकारी पर आधारित है।
ईडी के निशाने पर सबसे पहले बाबा की दिव्य फार्मेसी है, जो सालाना करोड़ों की आयुर्वेदिक दवाइयां निर्यात करती है। आरोप है कि इन दवाओं की कीमत विदेश में जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती है और इसकी आड़ में विदेशों में जमा काला धन वापस लाया जाता है। ईडी निर्यात की गई दवाओं, उनकी कीमत और उनसे हुई आय का विस्तृत ब्यौरा दिव्य फार्मेसी से मांगने की तैयारी में है। संबंधित बैंकों से भी दिव्य फार्मेसी के खातों का ब्यौरा मांगा जा रहा है। पतंजलि योगपीठ की ओर से विदेशों में लगाए गए योग शिविरों और उनसे हुई कमाई की भी जांच ईडी कर रहा है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनके खिलाफ फेमा के तहत कार्रवाई में जुट गया है। इसके तहत बाबा और उनसे जुड़े संस्थानों की विदेशों में संपत्ति और निवेशों की गुपचुप जांच शुरू कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय इस बात की भी जांच कर रहा है कि रामदेव द्वारा हुए निवेश और विदेशी मुद्रा के लेन-देन में फॉरेन एक्सचेंज नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। जल्द ही बाबा को नोटिस भेजकर जवाब-तलब किया जाएगा।
निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी के निशाने पर स्कॉटलैंड का एक द्वीप है जिसे रामदेव के एक भक्त ने उन्हें उपहार के तौर पर दिया था। लिटिल कमब्रे नाम का यह आइलैंड स्कॉटलैंड के लार्ग्स कस्बे के पास है। यह भारत से बाहर बाबा रामदेव का बेस माना जाता है और यहीं पर रामदेव ने वेलनैस सेंटर भी खोल रखा है। बाबा रामदेव के अलावा उनके ट्रस्ट पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के निवेश और पैसों के लेनदेन पर भी कड़ी निगाह रखी जा रही है।
जांच के बाद अगर कुछ गड़बड़ी मिली तो उसके बाद यह तय किया जाएगा कि बाबा के खिलाफ फेमा के तहत केस दर्ज किया जाए या प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत। यह जांच विभिन्न आधिकारिक स्रोतों से मिले दस्तावेजों और इंटेलिजेंस जानकारी पर आधारित है।
ईडी के निशाने पर सबसे पहले बाबा की दिव्य फार्मेसी है, जो सालाना करोड़ों की आयुर्वेदिक दवाइयां निर्यात करती है। आरोप है कि इन दवाओं की कीमत विदेश में जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती है और इसकी आड़ में विदेशों में जमा काला धन वापस लाया जाता है। ईडी निर्यात की गई दवाओं, उनकी कीमत और उनसे हुई आय का विस्तृत ब्यौरा दिव्य फार्मेसी से मांगने की तैयारी में है। संबंधित बैंकों से भी दिव्य फार्मेसी के खातों का ब्यौरा मांगा जा रहा है। पतंजलि योगपीठ की ओर से विदेशों में लगाए गए योग शिविरों और उनसे हुई कमाई की भी जांच ईडी कर रहा है।
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