नोएडा एक्सटेंशन के ग्राहकों पर दोहरी मार
नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डरों का जमीन आवंटन रद्द होने के बाद कई परियोजनाएं रद्द होने की कगार पर पहंुच गई हैं। ऐसे में वहां फ्लैट बुक करा चुके ग्राहक दोहरी दिक्कत में फंस गये हैं। प्रभावित परियोजनाओं में फ्लैट की संभावनाएं खत्म हो रही हैं, जो ग्राहक इन फ्लैटों के लिए होम लोन ले चुके हैं उन्हें भी अब इसे बिल्डरों से वापस लेकर बैंकों में जमा कराने की समस्या से दो चार होना पड़ सकता है। हालांकि रीयल एस्टेट क्षेत्र एक प्रस्ताव के साथ अगले एक दो दिनों में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से मिलकर इस समस्या का हल निकालने की कोशिश करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ही नोएडा एक्सटेंशन के एक हिस्से में भूमि अधिग्रहण के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को गलत ठहराते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर ही मुहर लगा दी है। इससे रीयल एस्टेट क्षेत्र की कुछ कंपनियों की परियोजनाएं रद्द होने की कगार पर पहंुच गई हैं। आम्रपाली जैसे कुछ डेवलपरों ने तो इन परियोजनाओं में फ्लैट बुक कराने वाले ग्राहकों अपनी दूसरी परियोजनाओं में फ्लैट देने का ऐलान कर दिया है। कंपनी के एमडी अनिल शर्मा ने बताया कि अपनी परियोजना वो पहले ही रद्द करके ग्राहकों को अन्य परियोजनाओं की सदस्यता दे चुके हैं। अदालत के फैसले के बाद नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट बुक कराने वाले उन ग्राहकों की दिक्कत बढ़ सकती है जिन्हें दूसरी परियोजनाओं में जगह नहीं मिलेगी। खासतौर पर ऐसे ग्राहक जो अपने फ्लैट के लिए बैंकों से होम लोन मंजूर करवा चुके हैं और उसका कुछ हिस्सा डेवलपरों को जारी भी हो चुका है। इस लोन की वापसी की जिम्मेदारी उन ग्राहकों पर ही आ सकती है। बैंकों का मानना है कि होम लोन ग्राहक को मंजूर किया जाता है लिहाजा उसकी वापसी के लिए भी वही जिम्मेदार होगा। सार्वजनिक क्षेत्र के कारपोरेशन बैंक के एक अधिकारी के मुताबिक, किसी भी परियोजना में फ्लैट बुक करने के बाद उसके लोन की पूरी जिम्मेदारी ग्राहक की है। बैंक ग्राहक को ही लोन मंजूर करता है इसलिए उसे वापस करने की जिम्मेदारी भी ग्राहक की ही होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से करीब सात बिल्डरों की परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं
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