ब्रिजटाउन. भारत और वेस्ट इंडीज टेस्ट मुकाबलों में अंपायरिंग को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब ताजा अपडेट में ये सामने आया है कि पहली पारी में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को गलत तरीके से आउट दिया गया था। टीवी रीप्ले में अंपायर की ये गलती साफ दिख रही है (विवादास्पद वीडियो देखने के लिए रिलेटेड आर्टिकल की पहली खबर पर क्लिक करें)।
बारबडोस में हो रहे सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अंपायर ने नो बॉल पर आउट दे दिया। इससे पहले जमैका टेस्ट में भी धोनी को ही नोबॉल पर आउट दिया गया था।
अब इसे संयोग कहें या कप्तान धोनी का दुर्भाग्य, लेकिन दोनों टेस्ट मैचों में वो गलत अंपायरिंग का शिकार हुए। हालांकि दूसरी बार पूरी तरह से अंपायरिंग की गलती नहीं रही। दरअसल जिस गेंद पर विकेट गिरा उससे पहले वाली गेंद का रीप्ले देखकर टीवी अंपायर ने गलती से निर्णय दे दिया था। धोनी दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में दो रन बनाकर आउट हो गए।
क्या हुआ बारबडोस में?
भारतीय पारी के 15वें ओवर में फिडेल एडवर्ड्स की एक गेंद पर धोनी ने कैच उठा दिया। 2 रन के निजी स्कोर पर खेल रहे धोनी को मिड ऑन पर खड़े शिवनारायण चंद्रपॉल ने लपक लिया। उसी समय किए गए टीवी रीप्ले में एडवर्ड्स की गेंद वैध दिख रही थी, लेकिन दरअसल ये एक तकनीकी खराबी के कारण था। असल में एडवर्ड्स का पैर लाइन के बाहर चला गया था। बाद में आए फुटेज में ये बात सामने आई।
इसी मैच में अंपायर ने सुरेश रैना को भी गलत तरीके से आउट दिया, जो 53 रनों पर खेल रहे थे और वीवीएस लक्ष्मण के साथ भारत के लिए ठोस साझेदारी कर रहे थे। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 117 रनों की साझेदारी हो चुकी थी। अपायर असद रऊफ ने रैना को फारवर्ड शॉर्ट लैग पर कैच आउट करार दिया, जबकि गेंद उनके बल्ले से नहीं लगी थी। इसके बाद निराशा में रैना ने अपने बल्ले को झटका दिया और वे कुछ क्षण क्रीज पर खड़े रहे। इसके बाद अंपायर के निर्णय के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने के लिए उन पर मैच फीस का 25 फीसदी जुर्माना लगाया गया।
क्या हुआ था जमैका में ?
कप्तान धोनी को बिशू की नो बॉल पर आउट करार दिया गया। गेंद करते समय बिशू का पिछला पैर गेंदबाजी क्रीज की बाहरी लाइन पर पूरी तरह था, लेकिन अंपायर इसे नजरअंदाज कर गए।
अहम था धोनी का विकेट
कप्तान धोनी जिस समय आउट हुए तब तक महज 167 रन के योग पर पांच विकेट गिर चुके थे। यदि धोनी पिच पर टिक जाते तो भारत का स्थिति और मजबूत हो सकती थी। लेकिन थोड़ी सी अंपायर की और थोड़ी सी तकनीकी गलती के कारण धोनी महज 2 रन के निजी योग पर आउट हो गए। भारत की पहली पारी महज 201 रन पर सिमटी थी।
बारबडोस में अंपायर की गलती नहीं!
लेकिन बारबडोस में जो भी कुछ हुआ, उसमें टीवी अंपायर या फील्ड अंपायर की गलती नहीं कही जा सकती। अंपायर का दिखाई जा रही फीड पर कोई नियंत्रण नहीं है। ब्रॉडकास्टर ने जो भी फीड दिखाई, उसी आधार पर अंपायर निर्णय करता है। वह गेंद को अलग-अलग कोणों से दिखाने के निर्देश दे सकता है, लेकिन गेंद दिखाने का निर्णय ब्रॉडकास्टर का होता है।
हार्पर पर निकला था धोनी का गुस्सा
जमैका टेस्ट में खराब अंपायरिंग के बाद कप्तान धोनी ने ऑस्ट्रेलियाई अंपायर डैरिल हार्पर की आलोचना की थी। इससे दुखी होकर हार्पर ने डोमिनिका टेस्ट से नाम वापस ले लिया है। जमैका टेस्ट में भारत के चार बल्लेबाज गलत अंपायरिंग का शिकार हुए थे। इस टेस्ट में विराट कोहली, सुरेश रैना, हरभजन सिंह और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी गलत तरीके से आउट दिए गए।
आपकी राय
क्या यह सही समय है कि आईसीसी अंपायरिंग के गिरते स्तर को सुधारने के लिए बड़े बदलाव करे? क्या डीआरएस वगैरह को लागू करने से पहले अंपायरिंग के मूल तरीके में सुधार और टीवी रिप्ले को लेकर तकनीक को सौ फीसदी दुरुस्त नहीं करना चाहिए? क्या इस फैसले के लिए जिम्मेदार शख्स की जवाबदेही तय की जानी चाहिए? इन मुद्दों पर अपनी राय संतुलित शब्दों में जाहिर करें। टिप्पणियों के लिए आप खुद जिम्मेदार होंगे।
बारबडोस में हो रहे सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अंपायर ने नो बॉल पर आउट दे दिया। इससे पहले जमैका टेस्ट में भी धोनी को ही नोबॉल पर आउट दिया गया था।
अब इसे संयोग कहें या कप्तान धोनी का दुर्भाग्य, लेकिन दोनों टेस्ट मैचों में वो गलत अंपायरिंग का शिकार हुए। हालांकि दूसरी बार पूरी तरह से अंपायरिंग की गलती नहीं रही। दरअसल जिस गेंद पर विकेट गिरा उससे पहले वाली गेंद का रीप्ले देखकर टीवी अंपायर ने गलती से निर्णय दे दिया था। धोनी दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में दो रन बनाकर आउट हो गए।
क्या हुआ बारबडोस में?
भारतीय पारी के 15वें ओवर में फिडेल एडवर्ड्स की एक गेंद पर धोनी ने कैच उठा दिया। 2 रन के निजी स्कोर पर खेल रहे धोनी को मिड ऑन पर खड़े शिवनारायण चंद्रपॉल ने लपक लिया। उसी समय किए गए टीवी रीप्ले में एडवर्ड्स की गेंद वैध दिख रही थी, लेकिन दरअसल ये एक तकनीकी खराबी के कारण था। असल में एडवर्ड्स का पैर लाइन के बाहर चला गया था। बाद में आए फुटेज में ये बात सामने आई।
इसी मैच में अंपायर ने सुरेश रैना को भी गलत तरीके से आउट दिया, जो 53 रनों पर खेल रहे थे और वीवीएस लक्ष्मण के साथ भारत के लिए ठोस साझेदारी कर रहे थे। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 117 रनों की साझेदारी हो चुकी थी। अपायर असद रऊफ ने रैना को फारवर्ड शॉर्ट लैग पर कैच आउट करार दिया, जबकि गेंद उनके बल्ले से नहीं लगी थी। इसके बाद निराशा में रैना ने अपने बल्ले को झटका दिया और वे कुछ क्षण क्रीज पर खड़े रहे। इसके बाद अंपायर के निर्णय के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने के लिए उन पर मैच फीस का 25 फीसदी जुर्माना लगाया गया।
क्या हुआ था जमैका में ?
कप्तान धोनी को बिशू की नो बॉल पर आउट करार दिया गया। गेंद करते समय बिशू का पिछला पैर गेंदबाजी क्रीज की बाहरी लाइन पर पूरी तरह था, लेकिन अंपायर इसे नजरअंदाज कर गए।
अहम था धोनी का विकेट
कप्तान धोनी जिस समय आउट हुए तब तक महज 167 रन के योग पर पांच विकेट गिर चुके थे। यदि धोनी पिच पर टिक जाते तो भारत का स्थिति और मजबूत हो सकती थी। लेकिन थोड़ी सी अंपायर की और थोड़ी सी तकनीकी गलती के कारण धोनी महज 2 रन के निजी योग पर आउट हो गए। भारत की पहली पारी महज 201 रन पर सिमटी थी।
बारबडोस में अंपायर की गलती नहीं!
लेकिन बारबडोस में जो भी कुछ हुआ, उसमें टीवी अंपायर या फील्ड अंपायर की गलती नहीं कही जा सकती। अंपायर का दिखाई जा रही फीड पर कोई नियंत्रण नहीं है। ब्रॉडकास्टर ने जो भी फीड दिखाई, उसी आधार पर अंपायर निर्णय करता है। वह गेंद को अलग-अलग कोणों से दिखाने के निर्देश दे सकता है, लेकिन गेंद दिखाने का निर्णय ब्रॉडकास्टर का होता है।
हार्पर पर निकला था धोनी का गुस्सा
जमैका टेस्ट में खराब अंपायरिंग के बाद कप्तान धोनी ने ऑस्ट्रेलियाई अंपायर डैरिल हार्पर की आलोचना की थी। इससे दुखी होकर हार्पर ने डोमिनिका टेस्ट से नाम वापस ले लिया है। जमैका टेस्ट में भारत के चार बल्लेबाज गलत अंपायरिंग का शिकार हुए थे। इस टेस्ट में विराट कोहली, सुरेश रैना, हरभजन सिंह और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी गलत तरीके से आउट दिए गए।
आपकी राय
क्या यह सही समय है कि आईसीसी अंपायरिंग के गिरते स्तर को सुधारने के लिए बड़े बदलाव करे? क्या डीआरएस वगैरह को लागू करने से पहले अंपायरिंग के मूल तरीके में सुधार और टीवी रिप्ले को लेकर तकनीक को सौ फीसदी दुरुस्त नहीं करना चाहिए? क्या इस फैसले के लिए जिम्मेदार शख्स की जवाबदेही तय की जानी चाहिए? इन मुद्दों पर अपनी राय संतुलित शब्दों में जाहिर करें। टिप्पणियों के लिए आप खुद जिम्मेदार होंगे।
No comments:
Post a Comment