ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण के तौर-तरीकों पर सख्त एतराज जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार की कड़ी खिंचाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम किसी भी राज्य में और नंदीग्राम नहीं होने दे सकते। इसे रोकने के लिए इन मामलों में हस्तक्षेप करेंगे।
जस्टिस सदाशिवम और जस्टिस ए.के. पटनायक की बेंच ने सवाल किया कि आखिर अर्जेंसी क्लॉज लगाने की क्या जरूरत पड़ गई इन मामलों में ? इस क्लॉज के जरिए किसानों को आपत्ति उठाने से रोक दिया गया... पर इसकी जरूरत क्यों पड़ी ? ये फ्लैट किसके लिए बनाए जा रहे हैं ? इन्हें कौन बना रहा है ? हम इन मामलों को बारीकी से देखेंगे। हम राज्यों में और नंदीग्राम नहीं होने देना चाहते।
अदालत ने कहा, नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल) में भी ऐसे ही अर्जेंसी क्लॉज के जरिए किसानों को आपत्ति उठाने से रोक दिया गया था। इस वजह से वहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई।
बेंच ने कहा, ' हम अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते। आप (खेती लायक जमीन) एक पक्ष से लेते हो और दूसरे को दो देते हो। यह बंद होना चाहिए। अगर यह बंद नहीं होता है तो यह अदालत इसे बंद करने के लिए हस्तक्षेप करेगी। यह समाज के सिर्फ एक तबके का विकास है। '
सुप्रीम कोर्ट की ये सख्त टिप्पणियां ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी और सुपरटेक, आम्रपाली जैसे बिल्डरों की पिटीशन पर सुनवाई के दौरान आईं। बिल्डरों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए यह अपील की थी जिसके मुताबिक ग्रेटर नोएडा में जमीन अधिग्रहण नोटिसों को रद्द कर दिया गया था।
शीर्ष अदालत ने खास तौर पर महंगी बिल्डिंगें और फ्लैट्स बनाने के मकसद से किसानों की जमीन हासिल करने के लिए लैंड अक्वीजिशन ऐक्ट का अर्जेंसी क्लॉज लगाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। हाई कोर्ट ने 31 मई को ग्रेटर नोएडा के गुलिस्तान गांव में औद्योगिक विकास के नाम पर हुआ 170 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था।
जस्टिस सदाशिवम और जस्टिस ए.के. पटनायक की बेंच ने सवाल किया कि आखिर अर्जेंसी क्लॉज लगाने की क्या जरूरत पड़ गई इन मामलों में ? इस क्लॉज के जरिए किसानों को आपत्ति उठाने से रोक दिया गया... पर इसकी जरूरत क्यों पड़ी ? ये फ्लैट किसके लिए बनाए जा रहे हैं ? इन्हें कौन बना रहा है ? हम इन मामलों को बारीकी से देखेंगे। हम राज्यों में और नंदीग्राम नहीं होने देना चाहते।
अदालत ने कहा, नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल) में भी ऐसे ही अर्जेंसी क्लॉज के जरिए किसानों को आपत्ति उठाने से रोक दिया गया था। इस वजह से वहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई।
बेंच ने कहा, ' हम अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते। आप (खेती लायक जमीन) एक पक्ष से लेते हो और दूसरे को दो देते हो। यह बंद होना चाहिए। अगर यह बंद नहीं होता है तो यह अदालत इसे बंद करने के लिए हस्तक्षेप करेगी। यह समाज के सिर्फ एक तबके का विकास है। '
सुप्रीम कोर्ट की ये सख्त टिप्पणियां ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी और सुपरटेक, आम्रपाली जैसे बिल्डरों की पिटीशन पर सुनवाई के दौरान आईं। बिल्डरों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए यह अपील की थी जिसके मुताबिक ग्रेटर नोएडा में जमीन अधिग्रहण नोटिसों को रद्द कर दिया गया था।
शीर्ष अदालत ने खास तौर पर महंगी बिल्डिंगें और फ्लैट्स बनाने के मकसद से किसानों की जमीन हासिल करने के लिए लैंड अक्वीजिशन ऐक्ट का अर्जेंसी क्लॉज लगाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। हाई कोर्ट ने 31 मई को ग्रेटर नोएडा के गुलिस्तान गांव में औद्योगिक विकास के नाम पर हुआ 170 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था।
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